शुक्रवार, 12 जून 2020

मन ....

मुसाफिर है भटकता रहता है मन ....
अकेला खुद में सहमा सा  रहता है मन....
बिन पंखो के ही उड़ता रहता है मन.....
यह सही वो गलत करता रहता है मन....
मिल जाए मंजिल भी अगर,
फिर भी शंका से भरा रहता है मन.... 

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