कुछ तो उस माँ ने सोचा होगा,
महान भी कितना इंसान होगा,
भूख से हाल उसका बेहाल होगा,
उसके लिए इंसान भी भगवान होगा,
पर उसे भी कहा अपने अन्त समय का ज्ञान होगा,
शायद उस माँ ने यह कभी सोचा न होगा ||
वो इंसान भी कितना निर्दय होगा,
जिसे मंदिर में पूजता होगा,
वो अवतार भी किसका होगा,
यह कभी सोचा न होगा ||
वो अवतार भी किसका होगा,
यह कभी सोचा न होगा ||
अब वो इंसान भी परेशान होगा,
कुदरत भी अपना करिश्मा दिखा रहा होगा,
इस निर्मम हत्या को सागर की लहरों से जता रहा होगा ||कुदरत भी अपना करिश्मा दिखा रहा होगा,

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